दो घर वाले मालिक पर Tax Rules में बदलाव

अंतरिम बजट 2019 में ऐसे लोगों के लिए खास एलान हुआ जिनके दो घर हैं. बजट में प्रस्ताव है कि अगर आपका दूसरा घर खाली है तो वह Tax के दायरे में नहीं आएगा. उसे भी Self occupied की तरह लिया जाएगा. नया प्रावधान 2019-20 से लागू होगा.

अभी दो घर होने पर Self occupied property पर मिलने वाला लाभ एक घर तक सीमित है. दूसरे घर को किराये पर दिया हुआ मान लिया जाता है. उसके नोशनल रेंट पर Tax लगता है.

दो घर वाले मालिक पर Tax Rules में बदलाव

डेलॉयट इंडिया में Partner तपती घोष कहती हैं कि आयकर कानून के तहत होम लोन के Interest को डिडक्शन की तरह क्लेम किया जा सकता है. Self occupied property के लिए डिडक्शन की सीमा 2 Lakh Rupees है. वहीं, किराये पर उठाई गई Property के मामले में डिडक्शन के तौर पर Interest की रकम की ऊपरी सीमा नहीं है.

मान लेते हैं कि किसी के पास दो घर हैं. इन पर अलग-अलग होम लोन है.

पहली स्थिति:

एक Self occupied property है, दूसरी किराये पर उठी है

Self occupied property के मामले में हाउस लोन के Interest पर 2 Lakh Rupees तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है. किराये पर दी गई Property के लिए इस तरह की सीमा नहीं है. यदि Calculation में दो Property से नुकसान आता है तो इनकम के अन्‍य स्रोतों से अधिकतम 2 Lakh Rupees Set off कर सकते हैं. बाकी की रकम 8 आकलन वर्षों के ल‍िए Carry Forward की जा सकती है.

दूसरी स्थिति:

दोनों Property किराये पर उठी हैं

दोनों घरों की आय से होम लोन पर पूरे Interest को डिडक्शन के तौर पर क्लेम किया जा सकता है. Interest की कोई ऊपरी सीमा नहीं है. हालांकि, Calculation में दो Property से नुकसान होने पर इनकम के दूसरे स्रोतों से अधिकतम 2 Lakh Rupees Set off किया जा सकता है. बची हुई रकम 8 निर्धारण वर्ष में Carry Forward की जा सकती है.

तीसरी स्थिति:

मौजूदा प्रावधान के अनुसार

केवल एक घर को Self occupied माना जाएगा. दूसरी Property के खाली होने पर भी मान लिया जाएगा कि वह किराये पर उठी है. घोष ने कहा कि करदाता अपनी इच्छा से चुन सकता है कि किस Property को वह Self occupied के तौर पर लेगा. जिस Property से उसे अधिकतम बेनिफिट हो सकता है, वह उसे चुनने के लिए आजाद है.

अंतरिम बजट में संशोधन के अनुसार

दोनों घरों को Self occupied के तौर पर लिया जाएगा और इस मामले में नोशनल इनकम नहीं मानी जाएगी. दोनों होम लोन के कुल Interest पर डिडक्शन के तौर पर अधिकतम 2 Lakh Rupees की छूट का फायदा लिया जा सकता है.

आपकी Tax Saving पर असर

लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन अटॉर्नीज में Partner एस वासुदेवन कहते हैं कि संशोधन से करदाता को ज्यादा Tax देना पड़ सकता है. इसके दो कारण हैं. पहला, होम लोन के Interest पर डिडक्शन की सीमा. दूसरा, दो घरों से हुए कुल नुकसान को बाद के वर्षों में Carry Forward करने की बंदिश.

नए प्रस्ताव के अमलीजामा पहनाने के बाद Interest का डिडक्शन 2 Lakh Rupees तक सीमित हो जाएगा. साथ ही करदाता नुकसान को Carry Forward नहीं कर पाएंगे. इस तरह उन्हें ज्यादा Tax देना होगा.

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